सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

नवंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दिल की तनहाई

फिर एक बार इन हंसी चेहरों पर,      कोई नज़्म ‌ याद आई है।  मैं गुनगुना रहा हूं जिसे इस महफिल में,  हर तरफ शोर मगर इस दिल में तन्हाई है। चेहरे से कोई बेवफा नहीं लगता,  मगर हर चेहरे में अब मुझको खुदा नहीं दिखता। ये जुल्फों के साए जो तुम्हें पल भर सुकून देते हैं, हमने कई बार में फंसकर चोट खाई है।। फिर एक बार इन हंसी चेहरों पर,      कोई नज़्म ‌ याद आई है ।। फिर एक बार इन हंसी चेहरों पर,      कोई नज़्म ‌ याद आई है।