फिर एक बार इन हंसी चेहरों पर, कोई नज़्म याद आई है। मैं गुनगुना रहा हूं जिसे इस महफिल में, हर तरफ शोर मगर इस दिल में तन्हाई है। चेहरे से कोई बेवफा नहीं लगता, मगर हर चेहरे में अब मुझको खुदा नहीं दिखता। ये जुल्फों के साए जो तुम्हें पल भर सुकून देते हैं, हमने कई बार में फंसकर चोट खाई है।। फिर एक बार इन हंसी चेहरों पर, कोई नज़्म याद आई है ।। फिर एक बार इन हंसी चेहरों पर, कोई नज़्म याद आई है।